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हरे-भरे आम के बाग पर चला आरा, रात के अंधेरे में काटे गए कई दशक पुराने पेड़

27 June 2026 • admin • ⏱ 1 Min Read👁 11 Views
Published: 27 June 2026, 09:35 AMUpdated: 27 June 2026, 09:35 AM

वन रेंज दुबग्गा

काकोरी के मोहद्दीनपुर में प्रतिबंधित हरे-भरे आम के बाग पर चला आरा, रात के अंधेरे में काटे गए कई दशक पुराने पेड़

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहद्दीनपुर गांव में पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कई दशक पुराने हरे-भरे एवं फलदार आम के पेड़ों की कथित रूप से अवैध कटान कर दी गई। बताया जा रहा है कि यह पूरी कार्रवाई देर रात और तड़के सुबह के समय अंजाम दी गई, ताकि संबंधित विभागों की नजर से बचा जा सके।

ग्रामीणों का आरोप है कि शासन और प्रशासन द्वारा हरित वृक्षों की सुरक्षा तथा अवैध कटान पर रोक लगाने के लिए लगातार निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कुछ भू-माफिया और लकड़ी ठेकेदार नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। कई वर्षों से फल दे रहे इन विशाल आम के पेड़ों को मशीनों से काटकर जमींदोज कर दिया गया, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

रात के अंधेरे में होता है अवैध कटान का खेल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वन विभाग एवं पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए कथित रूप से पेड़ों की कटान रात के सन्नाटे या भोर के समय की जाती है। इसके बाद लकड़ियों को तत्काल छोटे-बड़े वाहनों के माध्यम से अन्य स्थानों पर पहुंचा दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सिलसिला लंबे समय से जारी है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण इसमें शामिल लोगों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

बिना ट्रांजिट पास (TP) के लकड़ी परिवहन का आरोप

सूत्रों के अनुसार, नियमानुसार वृक्षों की कटान और उनकी लकड़ी के परिवहन के लिए वन विभाग से ट्रांजिट पास (TP) प्राप्त करना आवश्यक होता है। आरोप है कि इस मामले में बिना वैध ट्रांजिट पास के ही लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है। इतना ही नहीं, अवैध रूप से काटी गई लकड़ी को सीधे आरा मशीनों तक पहुंचाकर प्रसंस्करण भी कराया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने फलदार वृक्षों की कथित अवैध कटान से हरियाली लगातार खत्म होती जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभागों को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र के अन्य बाग भी इसी तरह समाप्त हो सकते हैं।

प्रशासन और वन विभाग पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन एवं वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता था।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा भविष्य में अवैध वृक्ष कटान रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है।

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